Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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सवा सेर गेहूँ किसी गाँव में शङ्कर नाम का एक कुरमी किसान रहता था।
सीधासादा गरीब आदमी था, अपने काम-से काम, न किसी के लेने में, न
देने में। छक्का पंजा न जानता था, छल-प्रपंच की उसे छूत भी न लगी
थी, ठगे जाने की चिन्ता न थी, ठग-विद्या न जानता था। भोजन मिला खा
लिया, न मिला चबेने पर काट दी, चबेना भी न मिला, तो पानी पी लिया और
राम का नाम लेकर सो रहा। किन्तु जब कोई अतिथि द्वार पर आ जाता था,
तो उसे इस निवृत्ति-मार्ग का त्याग करना पड़ता था। विशेषकर, जब
साधु-महात्मा पदार्पण करते थे, तो उसे अनिवार्यतः सासारिकता की शरण
लेनी पड़ती थी। खुद भूखा सो सकता था पर साधु को कैसे भूखा सुलाता,
भगवान् के भक्त ठहरे।
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