Book · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Page 211 of 251
Author: प्रेमचंद
Time0:00
Speed (WPM)0.0
Accuracy100.0%
Press start and type the lines exactly as shown. · Backspace is disabled — keep going even after a mistake.
सवा सेर गेहूँ किसी गाँव में शङ्कर नाम का एक कुरमी किसान रहता था।
सीधासादा गरीब आदमी था, अपने काम-से काम, न किसी के लेने में, न
देने में। छक्का पंजा न जानता था, छल-प्रपंच की उसे छूत भी न लगी
थी, ठगे जाने की चिन्ता न थी, ठग-विद्या न जानता था। भोजन मिला खा
लिया, न मिला चबेने पर काट दी, चबेना भी न मिला, तो पानी पी लिया और
राम का नाम लेकर सो रहा। किन्तु जब कोई अतिथि द्वार पर आ जाता था,
तो उसे इस निवृत्ति-मार्ग का त्याग करना पड़ता था। विशेषकर, जब
साधु-महात्मा पदार्पण करते थे, तो उसे अनिवार्यतः सासारिकता की शरण
लेनी पड़ती थी। खुद भूखा सो सकता था पर साधु को कैसे भूखा सुलाता,
भगवान् के भक्त ठहरे।
Press start and type the lines exactly as shown.
Not started