图书 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
第194页 / 共251页
作者: प्रेमचंद
时间0:00
速度 (WPM)0.0
准确率100.0%
按开始并准确输入每行文字。 · 退格键已禁用 — 即使输入错误也请继续。
'अगर इतने नाजुक-मिजाज हो, तो अव्वल दर्जे में क्यों नहीं बैठे!'
'कोई बड़ा आदमी होगा तो अपने घर का होगा। मुझे इस तरहमा रते, तो
दिखा देता।'
'क्या कसूर किया था बेचारे ने? गाड़ी में साँस लेने की जगह नहीं,
'खिड़की पर जरा सॉस लेने खड़ा हो गया तो उस पर इतना क्रोध! अमीर
होकर क्या आदमी अपनी इन्सानियत बिलकुल खो देता है?
'यह भी अंगरेजी राज है, जिसका आप बखान कर रहे थे।'
एक ग्रामीण बोला-दफ्तरन माँ घुस पावत नाही, ओपै इत्ता मिजाज!
ईश्वरी ने अंग्रेजी मे कहा-What an idiot you are Bir! और मेरा नशा
अब कुछ-कुछ उतरता हुआ मालूम होता था?
← लाग-डाँट प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ (1950) द्वारा
प्रेमचंद प्रेरणा →
74153 प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 1950 प्रेमचंद
आत्माराम
( १ )
按开始并准确输入每行文字。
未开始