Kitap · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Sayfa 78 / 251
Yazar: प्रेमचंद
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मीर साहब की बेगम किसी अज्ञात कारण से उनका घर से दूर रहना ही
उपयुक्त समझती थीं। इसी लिए वह उनके शतरंज-प्रेम की कभी आलोचना न
करतीं; बल्कि कभी-कभी मीर साहब को देर हो जाती, तो याद दिला देती
थी। इन कारणों से मीर साहब को भ्रम हो गया था कि मेरी स्त्री
अत्यन्त विनयशील और गंभीर है, लेकिन जब दीवानखाने में बिसात बिछने
लगी, और मीर साहब दिन-भर घर में रहने लगे तो उन्हें बड़ा कष्ट होने
लगा। उनकी स्वाधीनता में बाधा पड़ गयी। दिन-भर दरवाजे पर झाँकने को
तरस जातीं।
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