Kitap · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Sayfa 226 / 251
Yazar: प्रेमचंद
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जोखू भगत और बेचन चौधरी में तीन पीढ़ियों से अदावत चली आती थी। कुछ
डाँड़मेंड़ का झगड़ा था। उनके परदादों में कई बार खून खच्चर हुआ।
बापों के समय से मुकदमेबाजी शुरू हुई। दोनों कई बार हाईकोर्ट तक
गये। लड़कों के समय में सग्राम की भीषणता और भी बढ़ी। यहाँ तक कि
दोनों ही अशक्त हो गये। पहले दोनों इसी गाँव में आधे-आधे के
हिस्सेदार थे। अब उनके पास उस झगड़ेवाले खेत को छोड़कर एक अंगुल
जमीन भी न थी। भूमि गयी, धन गया, मान-मर्यादा गयी, लेकिन वह विवाद
ज्यों-का-त्यों बना रहा। हाईकोर्ट के धुरन्धर नीतिज्ञ एक मामूली-सा
झगड़ा तै न कर सके।
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