Книга · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Страница 113 из 251
Автор: प्रेमचंद
Время0:00
Скорость (WPM)0.0
Точность100.0%
Нажмите старт и печатайте строки точно. · Backspace отключен — продолжайте даже после ошибки.
संयोग से उसी वक्त एक कटा हुआ कनकौआ हमारे ऊपर से गुजरा। उसकी डोर
लटक रही थी। लड़कों का एक गोल पीछे-पीछे दौड़ा चला आता था। भाई साहब
लम्बे हैं ही। उछलकर उसकी डोर-पकड़ ली और बेतहाशा होस्टल की तरफ
दौड़े। मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।
← गुल्ली-डण्डा प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ (1950) द्वारा
प्रेमचंद शतरंज के खिलाड़ी →
110365 प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 1950 प्रेमचंद
लाटरी जल्दी से मालदार हो जाने की हवस किसे नहीं होती? उन दिनों जब
लॉटरी के टिकट आये तो मेरे दोस्त विक्रम के पिता और चाचा और अम्माँ
और भाई सभी ने एक-एक टिकट खरीद लिया। कौन जाने, किसकी तकदीर जोर
करे? किसी के नाम आये, रुपया रहेगा तो घर में ही!
मगर विक्रम को सब न हुआ। औरों के नाम रुपये आयेंगे, फिर उसे कौन
पूछता है। बहुत होगा दस-पाँच हजार उसे दे देंगे। इतने रुपयों में
उसका क्या होगा?
Нажмите старт и печатайте строки точно.
Не начат