Jezyki

Klawiatura

Strona 105 z 251

Autor: प्रेमचंद

Czas0:00
Predkosc (WPM)0.0
Dokladnosc100.0%

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie. · Backspace wylaczony — pisz dalej nawet po bledzie.

स्कूल का समय निकट था, नहीं ईश्वर जाने वह उपदेश-माला कब समाप्त
होती। भोजन आज मुझे निस्वाद-सा लग रहा था। जब पास होने पर यह
तिरस्कार हो रहा है, तो फेल हो जाने पर तो शायद प्राण हो ले लिये
जायँ। भाई साहब ने अपने दरजे की पढ़ाई का जो भयंकर चित्र खींचा था,
उसने मुझे भयभीत कर दिया। कैसे स्कूल छोड़कर नहीं भागा; यही ताज्जुब
है। लेकिन इतने तिरस्कार पर भी पुस्तकों में मेरी अरुचि
ज्यों-की-त्यों बनी रही। खेल-कूद का कोई अवसर हाथ से न जाने देता।
पढ़ता भी था; मगर बहुत कम। बस इतना कि रोज का टास्क पूरा हो जाय और
दरजे में जलील न होना पड़े। अपने ऊपर जो विश्वास पैदा हुआ था, वह
फिर लुप्त हो गया और फिर चोरों का-सा जीवन कटने लगा।
( ३ )

Nacisnij start i wpisz linie dokladnie.

Nie rozpoczeto