도서 · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
251페이지 중 210페이지
저자: प्रेमचंद
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इस घटना को हुए ५० वर्ष बीत चुके हैं। आप बेंदो जाइए, तो दूर ही से
एक सुनहरा कलस दिखायी देता है। यह ठाकुरद्वारे का कलस है। उससे मिला
हुआ एक पक्का तालाब है, जिसमें खूब कमल खिले रहते हैं। उसकी मछलियाँ
कोई नहीं पकड़ता। तालाब के किनारे एक विशाल' समाधि है। यही आत्माराम
का स्मृति-चिह्न है। उसके संबंध में विभिन्न किवदंतियाँ प्रचलित
हैं। कोई कहता है उसका रत्न-जटित पिंजड़ा स्वर्ग को चला गया। कोई
कहता है, वह 'सत्त गुरदत्त' कहता हुआ अंतर्ध्दान हो गया। पर यथार्थ
यह है कि उस पक्षी-रूपी चन्द्र को किसी बिल्ली-राहु ने ग्रस लिया।
लोग कहते हैं, आधी रात को अभी तक तालाब के किनारे आवाज आती है 'सत्त
गुरदत्त शिवदत्त दाता,
राम के चरन में चित्त लागा।'
महादेव के विषय में भी कितनी ही जन-श्रुतियाँ हैं। उनमें सबसे मान्य
यह है कि आत्माराम के समाधिस्थ होने के बाद वह कई सन्यासियों के साथ
हिमालय चला गया, और वहाँ से लौटकर न आया। उसका नाम आत्माराम
प्रसिद्ध हो गया।
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