Lingue

Tastiera

Pagina 96 di 251

Autore: प्रेमचंद

Tempo0:00
Velocita (WPM)0.0
Precisione100.0%

Premi inizia e digita le righe esattamente. · Backspace disattivato — continua anche dopo un errore.

अगर तुम्हें इस तरह उम्र गॅवानी है, तो बेहतर है, घर चले जाओ और मजे
से गुल्लीडंडा खेलो। दादा की गाढ़ी कमाई के रुपये क्यों बरबाद करते
हो?'
मै यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। जवाब ही क्या था। अपराध तो मैने
किया, लताड़ कौन सहे? भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी
लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति-बाण चलाते, कि मेरे जिगर के
टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती इस तरह जान तोड़कर मेहनत
करने की शक्ति मैं अपने में-न-पाता था और उस निराशा में जरा देर के
लिए मैं सोचने लगता-क्यों न घर चला जाऊँ। जो काम मेरे बूते के बाहर
है, उसमें हाथ डालकर क्यों अपनी जिन्दगी खराब करूंँ। मुझे अपना
मूर्ख रहना मंजूर था; लेकिन उतनी मेहनत!

Premi inizia e digita le righe esattamente.

Non iniziato