Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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बड़े भाई साहब मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे; लेकिन केवल
तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था, जब
मैंने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्व के मामले में वह जल्दीबाजी
से काम लेना पसन्द न करते थे। इस भवन की बुनियाद खूब मजबूत डालनी
चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते
थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान
कैसे पायेदार बने!
मै छोटा था, वह बड़े थे। मेरी उम्र नौ साल की थी, वह चौदह साल के
थे। उन्हें मेरी तम्बीह और निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार था।
और मेरी शालीनता इसी में थी कि उनके हुक्म को कानून समझूँ।
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