Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Pagina 233 di 251
Autore: प्रेमचंद
Tempo0:00
Velocita (WPM)0.0
Precisione100.0%
Premi inizia e digita le righe esattamente. · Backspace disattivato — continua anche dopo un errore.
दूसरी शंका--जो विद्या घमंडी बना दे उससे मूरख ही अच्छा। यह नथी
विद्या पढ़कर तो लोग सूट-बूट, घड़ी छड़ी, हैट-कोट लगाने लगते हैं,
अपने शौक के पीछे देश का धन विदेशियों की जेब में भरते हैं। ये देश
के द्रोही हैं।
भगत--गांजा-शराब की ओर आजकल लोगों की कड़ी निगाह है। नशा बुरी लत है
इसे सब जानते हैं। सरकार को नशे की दुकानों से करोड़ों रुपये साल की
आमदनी होती है। अगर दुकानों में न जाने से लोगों की नशे की लत छूट
जाय तो बड़ी अच्छी बात है। लेकिन लती की लत कहीं छूटती है? वह दुकान
पर न जाय तो चोरी-छिपे किसी-न-किसी तरह दोगुने-चौगुने दाम देकर, सजा
काटने पर तैयार होकर अपनी लत पूरी करेगा। ऐसा काम क्यों करो कि
सरकार का नुकसान अलग हो और गरीब रैयत का नुकसान अलग हो। और फिर
किसी-किसी को नशा खाने से फायदा होता है। मैं ही एक दिन अफीम न खाऊँ
तो गाँठों में दर्द होने लगे, दम उखड़ जाय और सरदी पकड़ ले।
एक आवाज--शराब पीने से बदन में फुर्ती आ जाती है।
Premi inizia e digita le righe esattamente.
Non iniziato