Libro · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Autore: प्रेमचंद
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ठाकुर ने फिर पूछा-तो क्यों सरकार, सब जमींदारों की जमीन छीन ली
जायगी?
मैंने कहा-बहुत से लोग तो खुशी से दे देंगे। जो लोग खुशी से न देंगे
उनकी जमीन छीननी ही पड़ेगी। हम लोग तो तैयार बैठे हुए हैं। ज्योंही
स्वराज्य हुआ, अपने सारे इलाके असामियों के नाम हिबा कर देंगे।
मै कुरसी पर पाँव लटकाये बैठा था। ठाकुर मेरे पाँव दबाने लगा। फिर
बोला-आजकल जमींदार लोग बड़ा जुलुम करते हैं सरकार! हमें भी हजूर
अपने इलाके में थोड़ी-सी जमीन दे दें, तो चलकर वहीं आपकी सेवा में
रहें।
मैंने कहा-अभी तो मेरा कोई अख्तियार नहीं है भाई; लेकिन ज्योंही
अख्तियार मिला, मैं सबसे पहले तुम्हें बुलाऊँगा। तुम्हें
मोटर-ड्राइवरी सिखाकर अपना ड्राइवर बना लूँगा।
सुना, उस दिन ठाकुर ने खूब भंग पी और अपनी स्त्री को खूब पीटा और
गाँव के महाजन से लड़ने पर तैयार हो गया।
( ५ )
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