पुस्तक · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
पृष्ठ 195 / 251
लेखक: प्रेमचंद
समय0:00
गति (WPM)0.0
सटीकता100.0%
स्टार्ट दबाएं और पंक्तियां सटीक टाइप करें। · बैकस्पेस अक्षम — गलती के बाद भी जारी रखें।
बैदों ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान
में प्रातः से सन्ध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खट खट किया करता
था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गए कि जब किसी
कारण से वह बन्द हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी है।
वह नित्यप्रति एक बार प्रातःकाल अपने तोते का पिंजड़ा लिये, कोई भजन
गाता हुआ तालाब की ओर जाता था। उस धुंधले प्रकाश में उसका जर्जर
शरीर, पोपला मुंह और झुकी हुई कमर देखकर किमी अपरिचित मनुष्य को
उसके पिशाच होने का भ्रम हो सकता था। ज्योंही लोगों के कानों में
आवाज आती,-'सत्त गुरुदत्त शिवदत्त दाता', लोग समझ जाते कि भोर हो
गया।
स्टार्ट दबाएं और पंक्तियां सटीक टाइप करें।
शुरू नहीं हुआ