Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Page 237 sur 251
Auteur: प्रेमचंद
Temps0:00
Vitesse (WPM)0.0
Précision100.0%
Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes. · Retour arriere desactive — continuez meme apres une erreur.
भाइयो, मुझे यहाँ देखकर अचरज मत करो, मैं स्वराज्य का विरोधी नहीं
हूँ। ऐसा पतित कौन प्राणी होगा जो स्वराज्य का निन्दक हो, लेकिन
इसके प्राप्त करने का वह उपाय नहीं है जो चौधरी ने बतलाया है और जिस
पर तुम लोग लट्टू हो रहे हो। जब आपस में फूट और राड़ है तो पंचायतों
से क्या होगा? जब विलासिता का भूत सर पर सवार है तो वह कैसे हटेगा,
मदिरा की दुकानों का बहिष्कार कैसे होगा? सिगरेट, साबुन, मोजे,
बनियाइन, अद्धी, तंजेब से कैसे पिण्ड छूटेगा? जब सेब और हुकूमत की
लालसा बनी हुई है तो सरकारी मदरसे कैसे छोड़ोगे?
Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes.
Non démarré