Livre · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
Page 231 sur 251
Auteur: प्रेमचंद
Temps0:00
Vitesse (WPM)0.0
Précision100.0%
Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes. · Retour arriere desactive — continuez meme apres une erreur.
ईश्वर का प्रतिनिधि है, उसकी आज्ञा के विरुद्ध चलना महान् पातक है।
राजविमुख प्राणी नरक का भागी होता है।
एक शंका-राजा को भी तो अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
दूसरी शंका-हमारे राजा तो नाम के हैं असली राजा तो विलायत के
बनिये-महाजन हैं।
तीसरी शंका-बनिये धन कमाना जानते हैं, राज करना क्या जाने?
भगतजी-लोग तुम्हें शिक्षा देते हैं कि अदालतों में मत जाओ, पंचायतों
में मुकदमे ले जाओ, ऐसे सच कहाँ हैं, जो सच्चा न्याय करें,
दूध-का-दूध पानी-का-पानी कर दें। यहाँ मॅुह-देखी बातें होंगी। जिनका
दबाव है उनकी जीत होगी। जिनका कुछ दबाव नहीं है वे बेचारे मारे
जायेंगे। अदालतों में सब कार्रवाई कानून से होती है, वहाँ छोटे-बड़े
सब बराबर हैं, शेर-बकरी सब एक घाट पानी पीते हैं। इन अदालतों को
त्यागना अपने पैरो में कुल्हाड़ी मारना है।
एक शंका-अदालतों में जायें तो रुपये की थैली कहाँ से लावें?
दूसरी शंका-अदालतों का न्याय कहने ही को है, जिसके पास बने हुए गवाह
और दॉव-पैच खेले हुए वकील होते हैं उसी की जीत होती है, झूठे-सच्चे
की परख कौन करता है, हाँ, हैरानी अलबत्ता होती है।
Clique sur démarrer puis tape exactement les lignes.
Non démarré