Book · प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
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Author: प्रेमचंद
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74151 प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ 1950 प्रेमचंद
नशा ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मै एक गरीब क्लर्क का,
जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में
परस्पर बहसें होती रहती थीं। मैं जमींदारों की बुराई करता, उन्हें
हिंसक पशु और खून चूसनेवाली जोंक और वृक्षो की चोटी पर फूलनेवाला
बझा कहता। वह जमींदारों का पक्ष लेता; पर स्वभावतः उसका पहलू कुछ
कमजोर होता था, क्योंकि उसके पास जमींदारों के अनुकूल कोई दलील न
थी। यह कहना कि सभी मनुष्य बराबर नहीं होते, छोटे-बड़े हमेशा होते
रहते है और होते रहेंगे, लचर दलील थी। किसी मानुषीय या नैतिक नियम
से इस व्यवस्था का औचित्य सिद्ध करना कठिन था। मैं इस वाद-विवाद की
गर्मा-गर्मी में अक्सर तेज हो जाता और लगने वाली बात कह जाता; लेकिन
ईश्वरी हारकर भी मुस्कराता रहता था। मैंने उसे कभी गर्म होते नहीं
देखा। शायद इसका कारण यह था कि वह अपने पक्ष की कमजोरी समझता था।
नौकरों से वह सीधे मुँह बात न करता था। अमीरों में जो एक बेदर्दी और
उद्दण्डता होती है, इसमें उसे भी प्रचुर भाग मिला था। नौकर ने
बिस्तर लगाने में जरा भी देर की, दूध जरूरत से ज्यादा गर्म या ठण्डा
हुआ, साइकिल अच्छी तरह साफ नहीं हुई, तो वह आपे से बाहर हो जाता।
सुस्ती या बदतमीजी की उसे जरा भी बर्दाश्त न थी पर दोस्तों से और
विशेषकर मुझसे उसका व्यवहार सौहार्द और नम्रता से भरा होता था। शायद
उसकी जगह मैं होता तो मुझमें भी वही कठोरताएँ पैदा हो जाती, जो
उसमें थीं; क्योंकि मेरा लोक-प्रेम सिद्धान्तों पर नहीं, निजी दशाओं
पर टिका हुआ था, लेकिन वह मेरी जगह होकर भी शायद अमीर ही रहता;
क्योंकि वह प्रकृति से ही विलासी और ऐश्वर्य-प्रिय था।
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